तेरे एहसास

मेरी हर अनकही बात को तेरे एहसास पहचानते हैं….

मेरी बेचैनी अधीरता को तेरे जज़्बात बखूबी जानते हैं….

हां मिलना देर से हुआ हमारा,फिर भी हम तुम्हे बेइंतहा चाहते हैं…

वो लम्हे दम तोड़ने से लगे हैं,धड़कने दो ज़ख्म मेरे करहाते है…

तू धड़कन है मेरे नाजुक से दिल की,हर लम्हा दिल में तेरी आहटे हैं…

आंखो में अश्कों का सैलाब है,पर मेरी रातों में तेरे ही ख़्वाब जगमगाते है…

हम्म…गैरमुमकिन हैं राब्ता ये तेरा मेरा,

लेकिन ये इकरार है मेरा…..हम तुम्हे बेहद बेहिसाब चाहते हैं…बहुत चाहते हैं…

🌹हेमलता🌹

पहली मुहब्बत

🌹🌹🌹

तेरी मुहब्बत मेरी रगों में बैलोस सी दौड़ रही है,

ज़र्रा ज़र्रा टूटा है दिल,दिलों पे ये कहर बहुत है….

अब तुम्हारा कोई मशवरा मुझ पर कारगर न होगा,

डूबा हूं मैं इश्क़ ए पारावार में तुम पे साहिल का असर बहुत है….

उतरा हूं समंदर ए इश्क में अब सफीने की बात ना कर,

पार लगा या डूबा दे मुझे तेरे हाथों में ज़ूद ए असर बहुत है…

हां गुज़र कर कुछ मौसम लौटा नहीं करते कभी भी,

टूटा है दिल किसी का इस बार बरसात का कहर बहुत है…

इश्क ए आलम का दस्तूर दर्द है बिखरना रिवाज़,

इस कदर उजड़ा हूं मैं हिज़्र में तेरे ये दिल ख़ाक बसर बहुत है…

जिस मोड़ से तूने छोड़ा था हाथ हम आज भी ठहरे वही हैं,

चल तू भी देख इश्क़ और इंतज़ार में हमारे असर बहुत है…

मेरी पहली मोहब्बत हो तुम,हर सितम गवारा है तेरा,

चाहत के ज़ख्म गहरे और जिंदगानी का सफर मुख़्तसर बहुत है…

🌹हेमलता🌹

विरह

🌹🌹उन्हें ये ज़िद थी के हम बुलाते,हमे ये उम्मीद वो पुकारे…. 🌹🌹

तुम्हें जीतने से बेहतर है मै हृदय अपना तुम पर हारता हूं…
तुम्हें प्रेम हो के ना हो तुम्हें मैं अपना सब कुछ मानता हूं…

विचारों की गहन पीड़ा से चलो आज मैं खुद को उभारता हूं…
प्रेम चरणों में रख तुम्हारे मैं सर्वस्व अपना तुम पर वारता हूं…

इन घनघोर मेघो सा व्याकुल मैं तुमसे मिलने की खातिर….
जैसे मेघ आए बड़े बन ठन कर मैं भी खुद को सवारता हूं…

तुम शिव समान सत्य सुंदर मैं मंदिर के कोई प्रांगण सा….
तुम कृष्ण से प्रेम पवित्र मैं तुलसी वृंदा सा खुद को मानता हूं…

ना राधा ना रुक्मणी न मीरा सी कोई प्रवीणता मुझ में…
फिर भी मैं प्रेम…सिर्फ प्रेम होकर सम्मुख तेरे झुकता हूं…

अधीर नयन निर्झर नीर व्याकुल मन विकल आत्मा…
तू ईश्वर सा मुझमें अपने अश्रु से तेरे चरणों का प्रक्षालन करता हूं…

🌹हेमलता🌹

चाहत

चालीस पार करने से पहले फिर तुम्हारे प्यार में पड़ जाना चाहती हूं..

बिखर जाए मेरा काजल तुम्हारे हाथो से
फिर एक बार तुम्हारी आंखों से खुद को देखना चाहती हूं..

मेरे माथे पर आने वाली जुल्फ़ को अपने हाथो से हटाओ,
फिर एक बार तुम मुझमें खो जाओ चाहती हूं..

तुम्हारे होठों की लालिमा मेरे माथे का सिंदूर हो जाए,
फिर एक बार तुम मेरे इतना करीब हो जाओ चाहती हूं..

तुम्हारी हृदय स्पंदन मेरे पायल की झंकार हो जाए
फिर एक बार तुम्हारा हृदय हो जाना चाहती हूं..

तुम्हारे प्यार में पड कर फिर बार लड़की बन जाना चाहती हूं
बस इतना ही चाहती हूं …..

कुछ ख़ास हूं मैं..

तेरी मुझ पर टिकी खामोश नजरें,
मुझे एहसास कराती है,कि कुछ ख़ास हूं मैं तेरे लिए…

तेरा बार बार मेरे पास से बेवजह गुजरना,
मुझे एहसास कराता है,कि कुछ ख़ास हूं मैं….

तेरा अपनी हर बात में मेरा ही जिक्र करना,
मुझे एहसास कराता है कि कुछ ख़ास हूं मैं तेरे लिए…

तेरा मेरी आंखों को देख कर यूं गुनगुनाना,
मुझे एहसास कराता है कि कुछ ख़ास हूं मैं तेरे लिए….

मेरी मौजूदगी से तेरा बार बार बेकरार हो जाना,
मुझे एहसास कराता है कि कुछ ख़ास हूं मैं तेरे लिए….

तेरा सबके बीच से छुप छुप कर मुझे देखना,
मुझे एहसास कराता है कि कुछ ख़ास हूं मैं तेरे लिए….

मेरी पायल की झंकार से तुझ पर मेरा सिहर हो जाना,
मुझे एहसास कराता है कि कुछ ख़ास हूं मैं तेरे लिए….

खामोशी

खामोशी
कैसी खामोशी पसरी है आज तेरे मेरे बीच में,
कभी आंखे भी बेहिसाब बाते किया करती थी….

आज आवाजों को भी आवाज की जरूरत है,
कभी दूरियों में भी बेहिसाब नज़दीकियां हुआ करती थीं…..

आज इस भीड़ में भी कितनी तन्हा रह गई हूं मैं,
कभी अकेले में भी मैं तेरे साथ हुआ करती थीं,

आज गहरा पसरा है सन्नाटा मेरी आंखों में,
कभी तेरी छोटी छोटी बाते मुझे गुदगुदा जाया करती थीं…..

आज किसी की बाते भी कोई सुकून नही देती मुझे,
कभी तुझे याद कर खुद ही मुस्कुरा जाया करती थीं…..

अब तेरे सामने होते हुए भी अंजान हो जाती हूं मैं,कभी तेरे दूर होने पर भी तेरा एहसास पा जाया करती थीं….

आज क्यों तुझसे इतना दूर हो गईं हूं मैं
कभी तुझे ही खोयी खोयी सी फिरती थी मैं

कुछ कहा जाए

कुछ कहा जाए
❤️❤️❤️
चलो फिर कुछ कहा जाए…..
कभी मेरी, कभी तेरी कहानी,
कभी कभी ये हमारी आंखों का पानी,
किसी की सुने,किसी को हाल-ए दिल सुनाया जाए……
❤️❤️❤️
चलो फिर कुछ कहा जाए…..
दस्ता कभी अपनों की,कभी बेगानो की,
हमारे हाथों से छूटते जज़्बातों की लम्हों की,
कहानी को सुने और सुनाया जाए……
❤️❤️❤️
चलो फिर कुछ कहा जाए,
बेकदमो के उन रास्तों की धूल से,
कभी कभी महकते कगज़ के फूल सी,
मुझसे होकर गुजरती कहानी को सुने और सुनाया जाए…..
❤️❤️❤️
चलो फिर कुछ कहा जाए…..
जंहा छोड़ा था मैने हाथ तेरा वहां से पुकारा जाए,
फिर हाथ थामे मीलो मील एक दूजे का चला जाए,
या बीच पसरी खामोशी को सुने और सुनाया जाए…..
❤️❤️❤️
या फिर खुदको बदल डालूं खुद के लिए…..
क्यों नाता रखू दर्द से,हर हाल में मुस्कुराया जाए,
जमीं छोटी है मेरे परवाज़ को क्यों न आसमां में उड़ा जाए,
ताबे में अपने होकर अपनी खुशी सुनी और सुनाई जाए….

सुषमा

तुम एक अनुपमा हो,
मेरे जीवन की ऊर्जा ऊष्मा हो,
क्योंकि मेरी सुषमा हो”तुम”…..
🌹🌹🌹🌹

तुमने मुझसे सदैव अंतुल प्रेम किया,
तुमने ही हमारी मित्रता को प्रगाढ़ किया,
मैने की जीवन में बहुत सी गलतियां,
पर मुझे अपने स्नेह से सदा तुमने माफ़ किया,
क्योंकि मेरी सुषमा हो”तुम”…..
🌹🌹🌹🌹

कभी मेरी मां बनकर मुझे दुलार किया,
बहन से बढ़कर तुमने मुझे मान दिया,
कभी भाई सा हर मुश्किल में संबल दिया,
तुम्हारी मित्रता से मैने ख़ुद को अलंकृत किया,
क्योंकि मेरी सुषमा हो “तुम”…..
🌹🌹🌹🌹

मुझ उपेक्षित को तुमने मित्रता योग्य समझ लिया,
फिर अपनी मित्रता से तुमने मेरा श्रृंगार किया,
सब से लड़कर हर ख़ुशी को मेरे नाम किया,
हे..सखा मैने तुम्हे कृष्ण और ख़ुद को सुदामा किया,
क्योंकि मेरी सुषमा हो”तुम”….
🌹🌹🌹🌹

तुमने हमारी मित्रता को प्रेम से सिंचित किया,
तुम्हारी मौजूदगी ने मुझे कभी न चिंतित होने दिया,
अपनी इस कविता को अपने अश्रुओ से सिंचित कर,
मेरे प्रति तुम्हारे समर्पण को मैने प्रणाम किया,
क्योंकि मेरी सुषमा हो”तुम”….
🌹🌹🌹🌹

धन्य हो गई मैं तुम्हारी मित्रता पाकर,
ईश्वर ने तुम्हारे रूप में मुझे ये उपहार दिया,
कोई लेखनी नहीं ऐसी जो तुम्हे व्यक्त कर सके,
पर मेरी अयोग्य लेखनी ने ये दुस्साहस किया,
क्योंकि मेरी सुषमा हो”तुम”….
🌹🌹🌹🌹

विवेक

🌷विवेक🌷

सूर्य जैसा चमकना है,
तो एक हो जाओ,
उठो जागो तुम विवेक हो जाओ…..
🌷🌷🌷
तोड़ो पैरों की बेड़ियों को,
मद में ना बेहोश हो जाओ,
उठो जागो तुम विवेक हो जाओ…..
🌷🌷🌷
खुलने दो पंखों को आसमानों में,
पिंजरे में ना कैद परिंदे हो जाओ,
उठो जागो तुम विवेक हो जाओ…..
🌷🌷🌷
मेहनत से हर संघर्ष को जीतो तुम,
गरीबी लाचारी से ना कमज़ोर हो जाओ,
उठो जागो तुम विवेक हो जाओ…..
🌷🌷🌷
खुले आसमान में अपना नाम लिखो,
हे बालक(आज के विद्यार्थी)तुम एक नए विवेक बन जाओ,
जागो तुम विवेक बन जाओ…..
🌷🌷🌷
हमारी शालाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए कुछ लिखने का प्रयास….

एहसास

एहसास

जाने यह कैसा एहसास हो तुम,
जहां देखती हूं वहां हो सिर्फ तुम ही तुम,

इन होती बारिश की बूंदों में,
मेरे ख्वाबों में मेरी नींदों में,
हो सिर्फ तुम ही तुम,
जाने ये कैसा एहसास हो तुम,

तेरे शहर के चांद की चांदनी में,
फूलों और कलियों की महकती रागनी में,
हो सिर्फ तुम ही तुम,
जाने ये कैसा एहसास हो तुम,

मेरे हृदय के हर स्पंदन में,
मेरी आंखों के दर्पण में,
हो सिर्फ तुम ही तुम,
जाने ये कैसा एहसास हो तुम,

मेरी बातों में मेरे जज्बातों में,
मेरे प्रेम में मेरी प्रीत में मेरे हर गीत में,
हो सिर्फ तुम ही तुम,
जाने ये कैसा एहसास हो तुम,

मुझे छू कर गुजरती हवाओं में,
ओंस में भीगी भीगी फजाओ में,
हो सिर्फ तुम ही तुम,
जाने ये कैसा एहसास हो तुम,

मेरे दिल के कितने पास हो तुम,
मुझे कितने खास हो तुम,
जहां देखती हूं वहां हो सिर्फ तुम,
जाने ये कैसा एहसास हो तुम ” सिर्फ तुम “,